ब्लैक स्पाट पर नहीं हो रहा काम, नेशनल व स्टेट हाईवे पर जा रही सबसे अधिक जान

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सड़क सुरक्षा के कार्याें को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। ब्लैक स्पाट पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। इन पर सांकेतिक, चेतावनी बोर्ड व अन्य सुरक्षा कार्य नहीं हुए हैं। यही वजह है कि यहां पर सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं। इनमें भी सबसे अधिक स्टेट हाईवे व नेशनल हाईवे पर हो रहे हैं। हर बार सड़क सुरक्षा की बैठक में इस संबंध में मुद्दा उठता है। सबसे अधिक कार्य भी नेशनल हाईवे व स्टेट हाईवे के ही लंबित रहते हैं। इसके बावजूद भी कोई सुधार नहीं हो रहा है। डीटीओ डा. सुभाष चंद्र का कहना है कि ब्लैक स्पाट का लगातार निरीक्षण किया जाता है। जो भी खामी होती है। उसकी रिपोर्ट तैयार की जाती है। मीटिग में भी इस संबंध में मुद्दा रखा जाता है। हर माह सड़क सुरक्षा की बैठक होती है। जिसमें एक-एक प्वाइंट व खामियां पर चर्चा होती है। बैठक में अधिकारी गंभीरता दिखाते हैं, लेकिन बाहर निकलते ही निर्देशों को भूल जाते हैं। परिवहन विभाग की ओर से सप्ताह के हर मंगलवार व वीरवार को सड़क सुरक्षा के कार्याें का निरीक्षण भी किया जाता है। इसकी रिपोर्ट तैयार होती है, लेकिन यह सब कागजी साबित हो रही है। सड़कों व चौराहे पर कैटआइ, जेब्रा क्रासिंग, रिफ्लेक्टर, सड़कों के बीच में सफेद पट्टी, ट्रैफिक कंट्रोल लाइट, संकेतक व चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए जा रहे हैं। जिससे हर समय हादसों का खतरा बना रहता है। लगातार हादसे भी होते हैं। जिले की बात करें, तो यहां पर 54 ब्लैक स्पाट चिह्नित किए गए हैं। इन पर ही सबसे अधिक हादसे होते हैं। हर ब्लैक स्पाट पर हुए हादसे का लेखा जोखा भी तैयार किया गया है। इसके बावजूद हादसे रोकने की दिशा में कोई काम होता नहीं दिखता। इन ब्लैक स्पाट पर हो चुके सबसे अधिक हादसे :
किशनपुर दामला में 25 हादसे हुए। इसमें 18 की मौत व 18 घायल हुए। करेहड़ा खुर्द नया बाइपास में 23 हादसे हुए। जिसमें 16 की मौत हुई व 25 घायल हुए। नेशनल हाईवे पर बस स्टैंड छप्पर में 26 हादसे हुए। इनमें से 13 की मौत हुई। 18 घायल हुए। नेशनल हाईवे पर कैल में 21 हादसे हुए। 17 की मौत हुई। 14 घायल हुए। बिलासपुर रोड जेल के पास 13 हादसे हुए। इसमें 5 की मौत हुई। 11 घायल हुए। ब्लैक स्पाट पर इस तरह की खामी :
किशनपुर दामला, सहारनपुर रोड पांसरा, नेशनल हाईवे पर थाना छप्पर, कैल के पास आदि जगहों पर ब्लैक स्पाट चिह्नित किए गए हैं। जोड़ियो से रादौर तक दामला, धौडंग व जुब्बल के पास सड़क चौड़ी नहीं है। दामला में वन वे है। यहां कोई संकेतक नहीं है। सबसे अधिक हादसे यही पर होते हैं। खजूरी मोड़ पर संकेतक नहीं है। जहां लगाए गए थे। वह टूट चुके हैं। अक्सर यहां पर हादसे होते रहते हैं।

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